*NCHRO ने की डॉ.कफ़िल के घरवालों से गौरखपुर में मुलाकात*

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29 April 2018 (Publish: 05:40 AM IST)

गोरखपुर 27 अप्रैल! गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में करीब सात महीने तक हिरासत में रहे डॉ. कफील को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जमानत दे दी ।लेकिन कागज़ी खनापूर्ति और जज के छुट्टी पर होने के कारण आज डॉ.कफ़िल की रिहाई मुम्किन हो सकी।डॉ.कफ़िल के छोटे भाई काशिफ खान के साथ कल गौरखपुर की जिला अदालत में एनसीएचआरओ के एड्वोकेट अन्सार इन्दौरी ने मुलाक़ात की और मुस्तक़बिल में इन्साफ की लड़ाई में मदद का वादा किया।
अदालत से सीधे डॉ. कफ़िल के दूसरे भाई आदिल साहब से घर पर मुलाक़ात हुई। ये अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ डॉ. कफ़िल से जेल पर मिलकर आये थे। आदिल साहब ने तफसीली गुफ्तगू में बताया कि डॉ.कफ़िल को क्यों बलि का बकरा बनाया गया। घटना के बाद समाज के रवैये से भी वो खासे नाराज़ दिखे। दौराने गुफ्तगू उन्होंने कहा कि सरकार ने न सिर्फ उनके भाई को जेल में डाला,बल्कि उनके करीबी लोगों पर भी ज़ुल्म किया।

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कोर्ट ने यह कहा है कि, कफील के खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही के कोई सबूत नहीं पाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि, उन्हें इतने महीने तक बेवजह जेल में रखा गया।

गौरतलब है कि अगस्त, 2017 में कथित तौर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में पांच दिन में 60 बच्चों की मौत हो गई थी। डॉ.कफील को सितंबर, 2017 में गिरफ्तार किया गया था। जस्ट‍िस यशवंत वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि, ऑन रिकॉर्ड ऐसी कोई सामग्री नहीं मिले है जिससे यह बात साबित हो सके कि आवेदक (कफील) ने चिकित्सीय लापरवाही की है. इसके अलावा उनके खिलाफ कोई कोई जांच भी नहीं शुरू की गई है।

डॉ. कफील को जमानत देने की मुख्य वजह कोर्ट ने यूपी सरकार के हलफनामे को बताया। कोर्ट ने कहा कि, यूपी सरकार ने अपने हलफनामे और खासकर उसके पैराग्राफ 16 में बच्चों की मौत के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की कमी को वजह नहीं माना है। यही नहीं, राज्य सरकार ने ऐसा कोई साक्ष्य भी पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो या संकेत मिले कि आवेदक ने प्रत्यक्षदर्श‍ियों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोशि‍श की है।

कोर्ट ने कहा कि, आवेदक एक डॉक्टर हैं और सरकारी कर्मचारी हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।डॉ. कफील खान ने जेल से एक लेटर जारी कर कहा था कि, उच्च स्तर के लोग ‘प्रशासनिक विफलता’ के लिए उन्हें बलि का बकरा बना रहे हैं।

शनिवार शाम को डॉ.कफ़िल को गौरखपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी बीवी,बेटी,भाई ,रिश्तेदार और बड़ी तादाद में शहर के लोग उनको जेल पर लेने पहुंचे।

*एनसीएचआरओ*
कैंप:गौरखपुर

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