विश्व बैंक ने कहा- नोटबंदी और जीएसटी की वजह से भारत की आर्थिक वृद्धि की गति हुई है प्रभावित

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11 October 2017 (Publish: 02:07 PM IST)

मिल्लत टाइम्स नई दिल्ली| October 11, 2017: भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बनी चिंताओं के बीच विश्व बैंक ने उसकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर कम रहने का अनुमान जताया है। नोटबंदी और माल एवं सेवाकर (जीएसटी) को प्रमुख कारण बताते हुए उसने 2017 में भारत की वृद्धि दर 7% रहने की बात कही है, जो 2015 में यह 8.6% थी। विश्व बैंक ने यह चेतावनी भी दी है कि अंदरुनी व्यवधानों से निजी निवेश के कम होने की संभावना है जो देश की वृद्धि क्षमताओं को प्रभावित कर नीचे की ओर ले जाएगा। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी 2017 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.7% कर दिया था। यह उसके पूर्व के दो अनुमानों से 0.5% कम है। जबकि चीन के लिए उसने 6.8% की वृद्धि दर का अनुमान जताया है।

विश्व बैंक ने अपनी द्विवार्षिक दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस रपट में कहा है कि नोटबंदी से पैदा हुए व्यवधान और जीएसटी को लेकर बनी अनिश्चिताओं के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि की गति प्रभावित हुई है। परिणामस्वरुप भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2017 में 7% रहने का अनुमान है जो 2015 में 8.6% थी। सार्वजनिक व्यय और निजी निवेश के बीच संतुलन स्थापित करने वाली स्पष्ट नीतियों से 2018 तक यह वृद्धि दर बढ़कर 7.3% हो सकती है

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उल्लेखनीय है कि इसी साल जून महीने में विश्व बैंक का अनुमान था कि 2017 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी, जो 2016 में 6.8 प्रतिशत रही थी। विश्व बैंक का कहना था कि भारत नोटबंदी के अस्थायी प्रतिकूल प्रभाव से अब उबर रहा है। विश्व बैंक ने अपने जनवरी के अनुमान की तुलना में भारत की वृद्धि दर के आंंकड़ों को 0.4 प्रतिशत संशोधित किया था। विश्व बैंक के अधिकारियों ने चीन की वृद्धि दर के 2017 के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा था। वहीं 2018 और 2019 में चीन की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

विश्व बैंक ने अपनी जून में वैश्विक आर्थिक संभावनाआें में 2018 में भारत की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत और 2019 में 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। जनवरी, 2017 के अनुमान की तुलना में 2018 में भारत की वृद्धि दर के अनुमान में 0.3 प्रतिशत तथा 2019 में 0.1 प्रतिशत की कमी की गई थी। विश्व बैंक ने तब कहा था कि भारत की वृद्धि दर के अनुमान में कमी मुख्य रूप से निजी निवेश में उम्मीद से कुछ नरम सुधार है।

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